अजित दादा के बाद NCP का मुखिया कौन? क्या कार्यकारी अध्यक्ष “प्रफुल्ल पटेल” के कांधो पर होगी पक्ष की जिम्मेदारी..!!

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गोंदिया। 30 जनवरी
महाराष्ट्र की राजनीति में राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष एवं राज्य के उपमुख्यमंत्री अजित पवार के विमान दुर्घटना में निधन हो जाने के बाद पूरा महाराष्ट्र शोक में है। अजित दादा पवार के बाद उनकी NCP की विरासत को संभालने को लेकर अब राज्य में चर्चा तेज हो गई है।

वर्तमान में अजित पवार के बाद राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी के कार्यकारी अध्यक्ष के रूप में राज्यसभा सांसद प्रफुल्ल पटेल के कांधो पर ही पक्ष की जिम्मेदारी है। सांसद प्रफुल्ल पटेल, पवार परिवार के नजदीकी और अनुभवी राजनेता है। वे पूर्व केंद्रीय मंत्री और दिल्ली से लेकर मुंबई तक राजनीतिक वजन रखते है। ऐसे में सवाल उठ रहा है कि अजित पवार के बाद NCP का मुखिया कौन होगा?

28 जनवरी की सुबह तक तो ये सवाल कहीं था ही नहीं. पर एनसीपी के मुखिया और महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री के तौर पर अजित पवार के निधन बाद ये सवाल अब खड़ा हो गया है।

शरद पवार की एनसीपी से टूटकर बनीं अजित पवार की एनसीपी महाराष्ट्र की महायुति सरकार में है। पक्ष के अनेक विधायक मंत्री है। वही अजित पवार के राजनीतिज्ञ गुरु चाचा शरद पवार की NCP महाविकास आघाड़ी के साथ विपक्ष में है। ऐसे में ये भी सवाल उठ रहा है कि क्या अजित दादा की एनसीपी, शरद पवार की एनसीपी के साथ एक हो जाएगी?

सवाल शायद हाँ भी हो सकता है और ना भी। क्योंकि शरद पवार के साथ जाने का मतलब राज्य की महायुति से नाता तोड़ना है। मतलब सरकार से बाहर होना। ऐसा शायद संभव नही। फिर क्या.?

बहरहाल अजित दादा के बाद पक्ष में दूसरे नम्बर के नेता के रूप में सांसद प्रफ़ुल्ल पटेल है। वही अजित पवार की पत्नी सुनेत्रा पवार, बेटा पार्थ पवार और जय पवार भी है। सुनेत्रा पवार राज्यसभा सांसद है वही पार्थ पवार राजनीति में सक्रिय है। छोटे बेटे जय पवार राजनीति से दूर है। इनके अलावा पार्टी के दिग्गज जयंत पाटिल, छगन भुजबल, सुनील तटकरे और धनंजय मुंडे भी है।

राजनीतिज्ञ ये भी कहते है कि भले ही ये सब अजित पवार के अपने और सबसे करीबियों में रहे हैं. लेकिन इनमें से कोई भी एक नेता ऐसा नहीं है, जिसके पास अजित पवार जैसी मास अपील और अजित पवार जैसी विल पावर है, जिसके जरिए वो पार्टी के अंदर और पार्टी के बाहर भी स्वीकार्य रहे हैं. ऐसे में पार्टी और परिवार दोनों को एक साथ बचाने के लिए जो एक नाम है और जिसपर शायद ही किसी को कोई आपत्ति होगी, वो नाम सिर्फ शरद पवार का है.

ऐसी मुश्किल परिस्थितियों में अगर शरद पवार आगे आते है तो उन्हें अजित पवार वाली एनसीपी को संभालने से पहले एनसीपी अजित पवार और एनसीपी शरद पवार को एक करना होगा. और ये काम बेहद मुश्किल है। ऐसे मुश्किल घड़ी में आगे क्या रणनीति बनती है ये तो पक्ष ही तय करेगा।

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